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अपने आप को नए उत्साह से भरने का समय

Liz DeCarlo

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क्लाइंट की मदद करते हुए अत्यधिक सहानुभूति के चलते होने वाली मानसिक अशांति और मानसिक व शारीरिक थकान से कैसे मुकाबला करें।

लॉकडाउन और वित्तीय उथल-पुथल वाली वैश्विक महामारी को शुरू हुए अब कई महीने बीत चुके हैं। अपनी नौकरी या सेवानिवृत्ति के बाद के लिए की गई बचत गवां चुके क्लाइंट को ढांढस बंधाने और मदद करने का समय। आप अपने क्लाइंट के पोर्टफ़ोलियो को व्यवस्थित करने, उनके जीवन बीमा कवर के बारे में उन्हें ध्यान दिलाने, उन्हें ऐसे अन्य क्लाइंट से जोड़ने, जिनके पास शायद नौकरी से जुड़े अवसर हों और उनकी तनाव व गुस्से से भरी बातों को सुनने के लिए हमेशा उनके साथ मौजूद रहे।

कोई व्यक्ति अन्य लोगों की भावनाओं को कितना संभाले, इसकी भी एक सीमा होती है और उन्हें यह पता भी नहीं होता कि ऐसा करने का असर उन पर भी पड़ सकता है।

कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी में पर्सनल फाइनेंशियल प्लानिंग मास्टर्स प्रोग्राम की निदेशक और फाइनेंशियल थेरेपी एसोसिएशन (एफटीए) के निदेशक मंडल की सदस्य Megan McCoy, जो कि एक Ph.D. होल्डर और LMFT हैं, वे बताती हैं कि यह शब्द “कम्पैशन फटीग” (सहानुभूति जताते-जताते पैदा होने वाली मानसिक अशांति) स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पेशवर लोगों द्वारा दिया गया एक तकनीकी शब्द है, जिसका मतलब आपके जीवन में आने वाली ऐसी स्थिति से है, जब लोगों के दुख, तनाव या गुस्से से भरी कहानियाँ आपके दिलो-दिमाग में घर कर जाती हैं। “सहानुभूतिपूर्ण होने के नाते आप भावनात्मक जुड़ाव या शारीरिक थकान महसूस करने लगते हैं। इसका असर यह भी हो सकता है कि आपके मन में सहानुभूति या दया भाव आना बंद हो जाए, क्योंकि आप पहले से ही कई लोगों को सहानुभूति दे चुके हैं।”

आपको कैसे पता चलता है कि आपको सहानुभूति जताने से जुड़ी मानसिक अशांति हो रही है? McCoy का कहना है कि आपको बहुत ज़्यादा दुख, थकान, गुस्से और हताशा का अहसास हो सकता है। इसके शारीरिक लक्षण सिरदर्द, पेटदर्द और थकावट हो सकते हैं।

McCoy कहती हैं कि अगर आप बिना ब्रेक लिए लंबे समय से काम करते आ रहे हैं, तो आपको भी मानसिक और शारीरिक थकान महसूस हो सकती है, जो आगे चलकर सहानुभूति जताने से जुड़ी मानसिक अशांति में बदल जाएगी और आपके लिए काम करना और भी मुश्किल हो जाएगा।

यहाँ पर भी वही बात लागू होती है, जो हम हर बार किसी हवाई जहाज में जाते समय सुनते हैं: दूसरों की मदद करने से पहले आपको अपना ऑक्सीजन मास्क लगाना पड़ेगा, यह कहना है FTA की पूर्व अध्यक्ष Meghaan Lurtz का, जो कि एक MS और Ph.D. होल्डर हैं। Lurtz का कहना है कि “COVID-19 की वजह से जिन हालातों से हम लोग गुज़र रहे हैं, वैसे ही हालातों का सामना वित्तीय सलाहकार भी कर रहे हैं, मुझे पता कि आप सभी को लग रहा है कि यह आपके लिए सबसे अहम पल जैसा है और वाकई में यह है भी।” “आप अपने क्लाइंट का साथ देने के लिए बेहद उत्साहित हैं, हो सकता है कि आप अपने क्लाइंट का साथ देने के लिए अपना नुकसान भी कर रहे हों, क्योंकि आप एक बेहतरीन सलाहकार हैं।”

“लेकिन उसके साथ ही आप खुद को सहानुभूति से जुड़ी मानसिक अशांति की चपेट में लाने का काम भी कर रहे होते हैं और कई तरह से आप अपने क्लाइंट के समक्ष गलत आदर्श पेश कर रहे होते हैं।”

तो आप अपने क्लाइंट की मदद करते हुए अत्यधिक सहानुभूति के चलते होने वाली मानसिक अशांति और मानसिक व शारीरिक थकान से कैसे मुकाबला करेंगे? Lurtz और McCoy ने इस समस्या से निपटने के कुछ तरीके बताए हैं:

1. सबसे पहले अपना ख्याल रखना।

अपने क्लाइंट से कहें कि आप रात में अपना मोबाइल फ़ोन ऑफ़ कर देते हैं, ताकि अपने परिवार को समय दे सकें और आप चाहते हैं कि वे भी ऐसा ही करें। समाचार बंद कर दें और दिनभर की तनावभरी बातों से अपना ध्यान हटाएँ। Lurtz का कहना है कि “सलाहकारों के लिए यह ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है कि अपनी भलाई के बारे में पहले सोचना स्वार्थीपन नहीं कहलाता।” भावनात्मक शांति पाने के लिए अपने लिए समय निकालें, ताकि जब आप अपने क्लाइंट से मिलें, तो आप भावनात्मक रूप से उनसे जुड़ सकें।

2. लोगों को सुनें और समझें, उनके दुख में डूब न जाएँ।

इन दोनों में आखिर अंतर क्या है? McCoy कहती हैं कि सहानुभूति का मतलब है किसी के दुख में खुद भी डूब जाना या उनके लिए दुखद महसूस करना। जबकि आपको उन्हें समझना चाहिए और उनकी बात सुनना चाहिए, जिससे आप खुद को उनकी जगह रखकर सोच पाएँगे और सही तरह से जान पाएँगे कि वे किस स्थिति में हैं। इससे आप उनकी समस्या के बारे में एक अलग नज़रिये से सोच पाएँगे और घबराहट व तनाव के कारण जिस तरह से वे फ़ैसले ले रहें है, वैसे ही भावनात्मक फ़ैसले लेने से बच जाएँगे।

Lurtz कहती हैं कि “जब तक हम अपने उद्देश्य पर कायम रहते हैं, तब तक हम अपने क्लाइंट की विचित्र समस्याओं को सही तरह से समझ सकते हैं, जिसके समाधान के लिए वे हमसे जुड़ हुए हैं।” इसका मतलब उन्हें समझना और सुनना है, लेकिन उनके साथ भावनाओं में बहना नहीं है।

3. किसी सहयोगी की मदद लें।

शायद आप और आपका क्लाइंट जब किसी तनाव और घबराहट में हों, तब अगर आपका कोई सहयोगी हो, तो बैठक के दौरान आप कोई चीज़ भूलें नहीं, यह सुनिश्चित करने में वह आपकी मदद करता है। McCoy कहती हैं कि “इससे इस बात का भी ध्यान रखा जा सकता है कि आप अपने क्लाइंट के साथ भावनाओं में बह न जाएँ।” वह सहयोगी फ़ीडबैक दे सकता है और एक अलग नज़रिया दे सकता है। किसी के साथ में होने से किसी परिस्थिति की वजह से क्लाइंट के मन में पैदा हुए गुस्से से बचने में भी मदद मिल सकती है, जो शायद क्लाइंट आप पर जाहिर करता।

4. क्लाइंट के साथ होने वाली बैठक में उम्मीद जगाएँ।

Lurtz कहती हैं कि अगर किसी क्लाइंट के साथ बैठक तनाव भरी होने की संभावना है, तो लक्ष्य के बारे में सोचें। Lurtz ने कहा कि “Maya Angelou की ओर से कही गई यह बात मुझे बेहद पसंद है। वे कहती हैं कि उम्मीद और डर कभी-भी एक जगह पर एक साथ नहीं रह सकते। किसी एक को अपने दिल में जगह दें।” “यह ज़रूरी है कि आप अपने क्लाइंट के साथ बैठक की शुरुआत इस तरह से करें कि लक्ष्य से जुड़े रहें और डर व घबराहट की वजह पहचानें।”

किसी वित्तीय हानि से प्रभावित हुए क्लाइंट के मामले में आमतौर पर यही होता कि वे अपने लक्ष्य से दूर हो जाते हैं, जैसे कि अगले ही साल सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं या शिक्षा खाते में सहयोग देने वाले हैं। Lurtz ने कहा, “ऐसे में ज़रूरी नहीं की वे धन को लेकर परेशान हों; वे इस बात को लेकर परेशान हो सकते हैं कि उनका लक्ष्य बदल गया है।” उनसे लक्ष्य के बारे में बात करें, उन्हें बताएँ कि उस लक्ष्य को अभी भी हासिल किया जा सकता है और आप उस मामले में उनके साथ काम करेंगे।

5. क्लाइंट को याद दिलाएँ कि कोई भी दौर ज़्यादा देर नहीं ठहरता।

चार्ट पेश करें और इतिहास की घटनाओं के बारे में बात करें। पहले फैल चुकीं वैश्विक महामारी जैसे सार्स के समय क्या हुआ था, उस बारे में बात करें। Lurtz ने सुझाव दिया कि उन्हें बताएँ कि 2008 में क्या हुआ था। “हालाँकि इतिहास से हमें यह नहीं पता चल सकता है कि भविष्य में आखिर क्या होने वाला है, लेकिन इससे हम यह समझ सकते हैं कि हालात फिर ठीक हो जाते हैं। तो आप अपने क्लाइंट से कह सकते हैं, इससे हमें क्या समझ में आता है। हम क्या उपाय कर सकते हैं।”

6. क्लाइंट को कोई न कोई काम सौपें।

Lurtz ने कहा कि क्लाइंट को शायद यह पसंद न आए कि जब वे वित्तीय सलाहकार के पास आएँ, तो उन्हें चुप बैठकर बस यह उम्मीद करने को कहा जाए कि सब ठीक होने वाला। तो फिर उन्हें कोई काम सौपें। यह काम हालात ठीक करने की प्रक्रिया से जुड़ा हो सकता है या फिर उन्हें उनके लक्ष्य के बारे में याद दिलाकर अपने नाती-पोतों के साथ थोड़ा और समय बिताने के लिए कहा जा सकता है।

7. सकारात्मक बातों के साथ अपनी मुलाकात ख़त्म करें।

Lurtz ने कहा, “आप इतिहास में हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं, अपनी वित्तीय मामलों की बेहतर समझ का पूरा उपयोग करके क्लाइंट को कोई ऐसा काम करने की सलाह देते हैं, जो उनके पोर्टफ़ोलियो पर विपरीत असर न डाले।” “और फिर जब आप बैठक ख़त्म करने जा रहे हों, तो फिर से Maya Angelou की कही गई बात पर गौर करें। हमें अपने दिल में उम्मीद जगाए रखनी चाहिए। तो आप एक बार फिर उन्हें उनके लक्ष्यों के बारे में बताने वाले हैं, उनके लिए क्या उम्मीदें हैं, समझाने वाले हैं और वे बैठक ख़त्म करने के बाद बेहतर महसूस करने वाले हैं।”

बातचीत का पूरा वीडियो देखने के लिए mdrt.org/compassion पर जाएँ।

 

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