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संकट के दौरान प्रेरित करने के लिए चार चरणों वाली योजना

Matt Pais

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Abdullah को व्यवसाय में तरक्की देखने को मिली, भला हो स्टाफ़ के साथ अपनाई गई उस सक्रिय कार्यनीति का।

कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के पहले दिन शायद कई सलाहकारों को समझ नहीं आ रहा होगा कि इस समस्या से कैसे पार पाया जाए। लेकिन Mohamad Manmohan Abdullah, ChFC, CLU, जानते थे कि पॉलिसी लेप्स हो सकती हैं और अगर वे उन पेशेवरों के साथ बातचीत करने के लिए नए तरीके नहीं तलाशते हैं, जिन्हें वे हमेशा आमने-सामने होने वाली मुलाकातों के ज़रिए जीवन बीमा के मामले में सलाह देकर मदद करते थे, तो वे क्लाइंट भ्रमित होने के साथ असहज महसूस कर सकते हैं।

मलेशिया के कुआलालंपुर के रहने वाले इस 25 वर्षीय MDRT सदस्य ने चार प्रेरक कदम उठाए, जो पहली बार में देखने पर सामान्य लग सकते हैं, लेकिन इस मुश्किल दौर में उन्हें मानसिक रूप से तैयार करने में बेहद प्रभावी रहे (साथ ही साथ उन 25 सलाहकारों की एक टीम को भी मानसिक रूप से तैयार कर पाए, जिसे वे संभालते हैं), इसके चलते उनके कारोबार में पिछले दो महीनों में 40% की बढ़ोतरी हुई:

1. नज़रिए में बदलाव लाने की ज़रूरत का पता लगा पाए

अपने नज़रिए में बदलाव लाने की ज़रूरत जब Abdullah को समझ आई, तो उन्होंने प्रत्येक सलाहकार को कहा कि वे उन्हें एक संदेश भेजें, जिसमें उन्हें यह बताने के लिए कहा कि उनकी मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता क्यों है। इससे क्लाइंट की पॉलिसी के साथ-साथ लगातार रूप से निष्क्रिय रहने से जुड़ी उनकी आशंकाओं के बारे में बातचीत शुरू करने में मदद मिली। क्लाइंट इंतज़ार कर रहे थे कि उनसे कोई संपर्क करे, लेकिन सलाहकार सामाजिक दूरी और वैश्विक संकट के तनाव से पैदा हुई रुकावटों के चलते मजूबर थे। Abdullah ने कहा, "यह दोनों के लिए लाभदायक स्थिति थी।" “क्लाइंट समझेंगे कि हम मदद करने के लिए उनसे बातचीत कर रहे हैं और COVID-19 के चलते उनकी पॉलिसी के बारे में जागरूकता बढ़ती जा रही है और वे जानने की कोशिश में हैं कि उन्हें कवर किया गया है या नहीं। ये क्लाइंट हमारा इंतज़ार कर रहे थे।”

2. उस सोच को दिमाग से निकाल दें, जो आपके लक्ष्य के अनुसार न हो

Abdullah, तनाव भरे माहौल को खत्म करना चाहते थे, इस पर उन्होंने काम करना शुरू किया और आदर्श उदाहरण पेश किया। इसलिए उन्होंने तय किया कि वे अपने मोबाइल में मौजूद सभी 600 नंबर पर कॉल करेंगे, भले ही उन्हें पता न हो कि वे किसे कॉल कर रहे हैं। सभी मौजूदा और पुराने क्लाइंट के साथ-साथ दोस्तों से बातचीत की शुरुआत करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य बस इन लोगों के हालचाल पता करना था, साथ ही अपनी टीम का आत्मविश्वास भी बढ़ाना था। ये सेल्स कॉल के जैसे कॉल नहीं थे, जो कि अजनबियों को किए जाते हैं, जबकि ये तो दोस्ताना लहजे में उन लोगों को किए गए कॉल थे, जिनके नंबर उनके पास पहले से ही थे।

जब उनकी टीम के बाकी सदस्यों ने यह तरीका अपनाया, तो वे न सिर्फ डर और चिंता के माहौल से बाहर आए, बल्कि वे अंचभित थे। Abdullah ने जितने भी लोगों को कॉल किया, उनमें से अधिकतर से वे जुड़े हुए थे और उन्होंने यह पता लगाया कि उनमें से कितने लोग अपने बीमा कवरेज को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने जिन लोगों से बात की उनमें एक क्लाइंट ऐसा था, जिसे डर था कि अगर वह बीमार हो गया और उसकी मृत्यु हो गई, तो उसके व्यवसाय और 18 मिलियन डॉलर के कर्ज का क्या होगा, इस चिंता की वजह से Abdullah को बीमा का बड़ा केस मिला। उन्होंने बताया कि "कुछ क्लाइंट डायबिटिक हैं, कुछ को उच्च रक्तचाप की समस्या है और कुछ ऐसी शारीरिक स्थिति में हैं, जिससे उन्हें इस वायरस का सबसे ज़्यादा खतरा है।" “किराना सामान की खरीदारी के अलावा वे इंश्योरेंस की खरीदारी भी कर रहे हैं।”

3. ऐसे सकारात्मक अनुभव नोट करें, जो लोगों की सोच बदल सकते हैं

इस सफलता के बावजूद, कुछ सलाहकार अभी भी कॉल करना नहीं चाह रहे थे, विशेष रूप से वे लोग, जो परिवार के सदस्य या दोस्त के COVID-19 से प्रभावित होने की वजह से चिंता में डूबे हुए थे। इसलिए Abdullah ने इन सलाहकारों को कोई तीन सकारात्मक बातें लिखकर रखने के लिए प्रोत्साहित किया, जिनसे उन्हें अच्छा महसूस हो - कार खरीदने से लेकर पुरस्कार जीतने तक या उनके जीवन में आने वाला कोई भी अच्छा बदलाव - और उस सकारात्मक भावना का उपयोग अपने आप को कॉल करने के लिए प्रेरणा देने के रूप में करने को कहा। इसके फलस्वरूप, उनके 25 में से 18 सलाहकारों ने क्लाइंट से संपर्क साधना शुरू कर दिया और उसे लेकर काम करने लगे, उनमें से कई को ऐसे पुराने क्लाइंट मिले, जो पुरानी पॉलिसी फिर से शुरू करना चाहते थे या कोई नई पॉलिसी खरीदना चाहते थे।

4. पहले कदम को हमेशा याद रखें

जैसा कि वे दूसरों के लिए करते हैं? Abdullah ने उन सभी सलाहकारों से फिर से संपर्क करके यह पता लगाने की कोशिश कि ऐसे कौन से बदलाव हैं, जो अभी भी किए जाने हैं। यदि कोई सलाहकार किसी क्लाइंट को लेकर चिंतित है कि कहीं उस क्लाइंट को यह लगेगा कि वह केवल प्रोडक्ट बेचने के लिए कॉल कर रहे हैं, तो Abdullah ने उस सलाहकार को अपनी सोच बदलने की ज़रूरत का ध्यान दिलाकर उनकी मदद की और उन्हें सलाह दी कि वे क्लाइंट से इस तरह बातचीत करें, जैसे वे उनका हालचाल जानने के लिए कॉल कर रहे हों। बेशक मौजूदा संकट, वायरस और बाजारों की चर्चा से बड़े ही स्वाभाविक तरीके से बातचीत की शुरुआत हो जाती थी। Abdullah ने कहा, "इस हफ्ते तक, शेष एक या दो सलाहकारों ने भी कामकाज करना और क्लाइंट का विश्वास जीतना शुरू कर दिया।” “उन्होंने देखा कि अन्य लोग क्या कर रहे हैं और कहने लगे कि ‘मैं भी कोशिश करके देखता/देखती हूँ।’”

अब तो कुछ लोग मलेशिया के कार्यालय में काम करने लगे हैं, कुछ क्लाइंट के साथ वर्चुअल मीटिंग की जा रही हैं, जबकि कुछ सलाहकार आमने-सामने मुलाकात कर रहे हैं, वो भी सुरक्षा से जुड़े सभी उपायों को अमल में लाते हुए। लेकिन उन लोगों के साथ कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया, जिन्होंने Abdullah से अपनी पॉलिसी पर फिर से विचार करने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि “ऐसा कोई व्यक्ति नहीं कहेगा कि आप किसी छुपे हुए उद्देश्य के साथ कॉल कर रहे हैं।” “वे इस बात से खुश होंगे कि आप उनका हालचाल लेने के लिए कॉल कर रहे हैं।”

संपर्क जानकारी: Mohamad Manmohan Abdullah mhdmohan@gmail.com

 

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